Monday, 25 September 2017

रिश्तों की मिठास हमारी ताक़त होती है

रिश्तों की मिठास 
हमारी ताक़त होती है 
जिसका हमें एहसास नही होता 
पर जब जन्म लेती है ,  उन रिश्तों मे खटास ,
ताक़त दम तोड़ती है 
और हमें एहसास होता है ............... 

काश हमें सही वक़्त पर इन बातों  में विश्‍वास हो जाए,
और हम कद्र कर सकें उन रिश्तों की 
जो हम सोच बैठते हैं की बेवजह थे ,
पर बाद मे समझ आता है 
नसीब वाले थे जो हमने ऐसे रिश्ते थे पाएँ 
जो ग़लत फैमियों की बुनियाद पर रख कर हमने गावाएँ .........................

हे प्रभु मैं कहीं भी कैसी भी हूँ, खुश हूँ अगर बिटिया हूँ

हे प्रभु
मैं कहीं भी
कैसी भी हूँ,
खुश हूँ अगर बिटिया हूँ
डगर कहीं हो
मुश्किलों में मंज़िल हो
मगर में
खुश हूँ अगर बिटिया हूँ
पर्वतों से घबराती नही
तूफ़ानो में रुकती नही ,
क्योंकि में
खुश हूँ , अगर बिटिया हूँ
बाबा की लड़ली
माँ की दुलारी
भाई की कलाई की खुसबु हूँ
अगर में बिटिया हूँ
हर जन्म मुझे बिटिया , का ही देना प्रभु
तुझसे मेरी है यही आरज़ू ..............

Friday, 22 September 2017

बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है अब वो सुकून नही

बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है
अब वो सुकून नही
बरसा करते थे हम अपनी धुन में
अब वो जुनून नही ,
क्योंकि हमारी बूँदों की टिप टिप अब धरती वासियों जागती नही
पुकारा करती थी हमें जो आवाज़ वो अब
हम तक आती नही ,
संसारिक सुख की चाह में मनुष्य हुमको भूल गया
इसलिए सावन का झूला सूखा ही झूल गया

Wednesday, 20 September 2017

ज़िंदगी से शिकायते नही रखी हमने सोचा जो मिला वो भला ,

ज़िंदगी से शिकायते नही रखी हमने
सोचा जो मिला वो भला   ,
पर इसका मतलब ये नही
कि हमें गम ही ना मिला ,
हमें एहसास देर से हुआ
की ज़माना हमसे जलता रहा ये सोच कर की
ये क्या किस्मत लेकर पला,
आज मन कहता है...............
गम मे मुस्कुराना हमारे लिए मुश्किल था,
गम दिखना आसान
दुनिया कैसी है
मैं समझ ना पाया नादान

Saturday, 16 September 2017

सपने

सपने
खुवाबों में तुम रखते हो हमसे वास्ता
हर उम्मीद का गुज़रता है तुमसे रास्ता ,
खो जाते हो तुम , भोर होने पर
ढूंढता रहता हूँ तुम्हे हर डगर ,
क्या वास्तविकता से तुम्हारा नाता नही
या
होश में बैठा मानव तुमको भाता नही .............

Friday, 15 September 2017

एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है
उन चेहरों के साथ ,
जिनके पीछे छिपे होते हैं गहरे राज़ ,
या यूँ कह लो की ज़िंदगी की गहराई का अनुभव मिलता है ,
जो किताबों के ज़रिए मुझे  मिलता नही
क्योंकि उनकी हसी के पीछे गम को
जब भी पढ़ने की कोशिश करता हूँ ,
तूफ़ानो में नाव चलाने के हुन्नर में
और भी गहरा उतरता हूँ 

Tuesday, 12 September 2017

गुज़रते वक़्त के साथ हम कितना भी दौड़ लें

गुज़रते वक़्त के साथ
हम कितना भी दौड़ लें
कुछ दिल से जुड़े लोगों की
हसीन यादें हमारा साथ कभी नही छोड़ती ,
वक़्त के हारे हम भले ही उनसे दूर हो जाएँ
पर यादें हमारे रास्तों को उनके पास ही मोड़ती.........