Sunday, 21 January 2018

इसे अब मत बुझा

देख नही पाया मैं आँखों के
समुंदर को.......उसके

और जब ये सैलाब बन उठा
तो एक ही आवाज़ सुनाई दी ,

इसे अब मत बुझा
जब दिखाए तभ तुमने देखे नही
अब ये रास्ता इन्होने खुद है चुना ...
धन्यवाद

Saturday, 20 January 2018

तुम्हें दिल दे दिया ......

शिकायत ही तो की थी तुमसे
ऐसा क्या गुनाह कर दिया ....

तुमने सच सुनकर मुँह फेर लिया
हमने तकलीफ़ सहने के बाद भी
तुम्हें दिल दे दिया ......

Wednesday, 17 January 2018

एकता ही बल है एकता ही सबल है .

वो मेरा है
ये तेरा है
इस सोच ने हमको घेरा है
काश हम इस सोच के दाएरे से
बाहर निकल सकें
ये हमारा है
मान कर
साथ चल सकें .....

एकता ही बल है
एकता ही सबल है ..........
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Monday, 15 January 2018

माँ

माँ

वो धूप में खड़ी रह कर
मेरा इंतेज़ार करती ,
मुझे पसीने में लिपटा देख भी
प्यार करती
मेरी एक मुस्कुराहट के लिए
घंटों नाच  करती,
माँ मेरी मुझसे बहुत प्यार करती,
माँ , मैं देश विदेश घूम रहा हूँ
किस तरह तुझे हर पल ढूँढ रहा हूँ,
उसका छोटा सा व्याख्यान करना चाहता हूँ
माँ इस चिट्ठी में , कुछ लम्हें तेरे नाम करना चाहता हूँ,

माँ के हाथ के बने खाने के लिए हर जगह तरस जाता हूँ
नींद तो बहुत दूर की चीज़ है
कोई प्यार से पुकार दे, तो उसमें तुझे ढूँढ उस पर बरस जाता हूँ
क्या बताउँ माँ
फ़ोन पर तेरे दो शब्द सुनने के  लिए ही फोने मिलता हूँ
' बेटा तूने खाना खाया '
ये सुन कर ही पेट भरा पाता हूँ
हर शक्स की आँखों में सवाल होता है
कि आज क्या क्या किया,
बस एक तू ही है जो कहती है
सो जा अब ,
'आज बहुत कुछ है किया'
बनावटी हेलो हाय करते करते जब थक जाता हूँ
एक तू ही याद आती है
जिसके आगे जैसा हूँ वैसा रह पाता हूँ,
 माँ तेरी ममता के आगे सिर झुकाता हूँ
चाहे आसमाँ छूँ लूँ
पर जहाँ की खुशियाँ मैं तेरे कदमों में ही पाता हूँ,

माँ मेरी बहुत चाहती है मुझे
मेरी माँ को मैं भी बहुत चाहता हूँ|

धन्यवाद

Friday, 12 January 2018

मैं फिर भी ज़िंदा हूँ

मैं फिर भी ज़िंदा हूँ


मौत से मिलकर किसी को मार देना, फिर भी आसान है
जीते  जी किसी के ज़मीर को मार कर, उसे ज़िंदा रहने पर मजबूर कर देना

क्या कहूँ ....... मैं......क्या कहूँ

वो एक लाश है
हर जगह है शमशान
जिस्म तो ज़िंदा है
पर मर गया भीतर बैठा इंसान,

देखती है वो हर ओर
नज़र आता है अंधेरा
उसके जीवन में वो रात रह जाती है
जिसका नही हो पाता कोई सवेरा,

जीती है फिर भी वो
क्योंकि साँसों का हिसाब पूरा हुआ नही
मर कर उसने इंसाफ़ पाया तो क्या
जो ज़िंदा रह कर, जीया ही नही................
मैं फिर भी ज़िंदा हूँ
धन्यवाद









Wednesday, 10 January 2018

दोस्तों को शान में कुछ कहना चाहती हूँ

दोस्तों को शान में
कुछ कहना चाहती हूँ
तुम्हारा साथ है
तो मैं जीना चाहती हूँ ,
लगता है ज़िंदगी खूबसूरत थी
तुम्हारे बिना भी
पर उस खूबसूरती का एहसास
मैं तुम्हारे वजूद से ही पाती हूँ ,
सब कुछ वही था
कुछ बदला भी नही था
पर चाहिए थी जो खिलखिलाती हुई शामे
वो तुम्हारे साथ ही सजाती हूँ ,
ये तो कुछ भी नही दोस्तों
मैं तुम्हारी शान में बहुत कुछ कहना चाहती हूँ ...

Monday, 8 January 2018

सुख की चाह करदो प्रवाह हो जाएगा सुकून से निकाह

सुख की चाह
करदो प्रवाह
हो जाएगा
सुकून से निकाह ...
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