Saturday, 19 August 2017

ठोकर खाए संभला होता .........काश


ठोकर खाए संभला होता .........काश 
जो गावा दिया वक़्त आज उसका गम ना होता .........काश
जो चाहते थे मुझे मैने उनको पुकारा होता ..............काश 
इस काश ने आज वक़्त की अहमियद बतलाई
दस्तक तो वो हर पल देता रहा 
पर मुझे ठोकर खा कर ही समझ आई 

Thursday, 17 August 2017

आज जाने वो घड़ी खुशनसीब है

आज जाने वो घड़ी खुशनसीब है
या उस घड़ी में हम
आकड़ा लगाना मुश्किल है
एक खुवाहिश रखी थी खुदा के आगे
उसने झट पूरी कर दी
मैने कटोरी माँगी थी
उसने पूरी थाली मेरी करदी ............

Friday, 11 August 2017

दोस्तों का साथ हो अगर ज़िंदगी बहुत खूबसूरत बन जाती है

यूँ ही चलें दो दिन अपने साथ बिताने
कुछ यारों की सुनने
कुछ मन की उनको सुनने ,
खुश नसीब हैं
जो आज के दौर में भी
ऐसे दोस्त नसीब हैं
वरना ज़िंदगी की असली महक के आनंद से हम वंचित रह जाते
तारों की छाओं में बैठ कर भी चाँदनी का
अहसास नही कर पाते
तब केवल तस्वीरों में हम मुस्कुराते
अब तस्वीरें भी हमारी मुस्कुराती हैं
दोस्तों का साथ हो अगर
ज़िंदगी बहुत खूबसूरत बन जाती है

Thursday, 10 August 2017

जय गुरु देव

हर जगह तुम्हारा एहसास है
खुवाब हो चाहे हक़ीक़त
सब में तुम्हारा वास है ,
मैं तुम्हें महसूस कर आनंद उठता हूँ
मेरे मौला मेरे सतगुरु
मैं तुम्हारे स्मरण से भी उर्जा पाता हूँ ,
तुम्हारी तस्वीर को निहारूं
तो हर्शुलास से भर जाता हूँ ,
तुम्हारे हर भक्त में
मैं खुद को देख पाता हूँ,
मेरे मौला मेरे सतगुरु
में तुम्हे बहुत चाहता हूँ
जय गुरु देव 

Wednesday, 9 August 2017

आज किताबें पढ़ कर ख़ाते है

नादान शब्दों में आसमान
छूँ लेते थे
चाँद किताबें क्या पढ़ीं
मंज़िलें आसमान की उँचाइयाँ नापने लगी
यूँ ही कुछ भी खा लेते थे तब
पच जाता था सब
आज किताबें पढ़ कर ख़ाते
 है
फिर भी बीमारियों से झूझ जाते हैं,

मुस्कुराहट सच्ची थी
आँसू भी सच्ची थे,
नादान शब्दों में कहें तो
जैसे थे वैसे ही दिखते थे,
आज चाँद किताबें क्या पढ़ ली
खुशी के पीछे गम छुपाए फिरते हैं
और गम का इज़हार करना चाहें तो
सच्चा यार ढूँढते फिरते हैं

Sunday, 6 August 2017

दोस्त शब्द की घहराई क्या खूब निखर कर आई,

दोस्त शब्द की घहराई
क्या
खूब निखर कर आई,
मैने वक़्त को पुकारा
तब दोस्त आए
जब मज़िलों ने मुझे स्वीकारा
तब दोस्त मुस्कुराए
जब खुदा को निहारा
तब दोस्त नज़र आए
जब हालात से बन बैठा बेचारा
तब दोस्त ने नीवाले खिलाए
दोस्ती की हदें अपनी आदत से मजबूर रहीं
दोस्तों के साथ गम की आंधियाँ दूर रहीं
सच्चे दोस्त ने हाथ क्या थामा
ठहरी हुई किस्मत की लकीरें चल गई
ज़िंदगी खूबसूरत ज़िंदगी में बदल गई.......

Saturday, 5 August 2017

रक्षा बंधन की शुभ कामनाएँ

भाई बहन के मन में
प्रेम की छवि हो
भाई की कलाई पर
राखी सजी हो,
आदान - प्रदान हो संस्कारो का
मिलन हो परिवारों का
चोंखट पर बेटियों का हो इंतेज़ार
ख़ुशियों संग मनें सब के त्योहार

रक्षा बंधन की शुभ कामनाएँ